पहला सत्य
मेरा अज्ञान है
इसीलिये खोजी हूँ मैं
सभी को देखती हूँ मैं
सभी को सुनती हूँ मैं
अभी तो खोजी हूँ मैं
तर्क करने की सीमा तक
अभी नहीं पहुँची हूँ मैं
खुद को समझना है मुझे
अभी समझाने नहीं
आयी हूँ मैं
शांति अधिक हो जाये
अभी तो घबरा जाती हूँ मैं
बाहर के संगीत से जी
तब बहलाती हूँ मैं
संगीत भीतर से मेरे
जिस दिन बाहर आयेगा
उस दिन अगर मूक भी
रहूँगी मैं तो मुझको
हर कोई सुन पायेगा
उस दिन कहूंगी
खोजी हूँ मैं
सब के चेहरे पर
मुस्कुराहट लायेगा।
मेरा अज्ञान है
इसीलिये खोजी हूँ मैं
सभी को देखती हूँ मैं
सभी को सुनती हूँ मैं
अभी तो खोजी हूँ मैं
तर्क करने की सीमा तक
अभी नहीं पहुँची हूँ मैं
खुद को समझना है मुझे
अभी समझाने नहीं
आयी हूँ मैं
शांति अधिक हो जाये
अभी तो घबरा जाती हूँ मैं
बाहर के संगीत से जी
तब बहलाती हूँ मैं
संगीत भीतर से मेरे
जिस दिन बाहर आयेगा
उस दिन अगर मूक भी
रहूँगी मैं तो मुझको
हर कोई सुन पायेगा
उस दिन कहूंगी
खोजी हूँ मैं
सब के चेहरे पर
मुस्कुराहट लायेगा।