Thursday, December 17, 2009

हर सुबह की
प्रार्थना के बाद
जब शुरू
होती है सुबह
और हम सभी
होते हैं भारतीय
तब हमारा
धर्मग्रन्थ
हमारा दैनिक
समाचार पत्र
हमारी रूहों
को धोता है
हमारी
बाइबिल,
रामायण
महाभारत,
कुरान
के अतीत
को वर्तमान
का आइना
दिखाता है
हमारी नैतिकता
के आधार
किस्से कहानियों
को करता
है दरकिनार
केवल एक
प्रश्न?
जो द्रश्य
मैं देख
रही हूं
क्या तुम
भी देख
रहे हो?
ईश्वर
अल्लाह
जीजस
बैठे हैं
सांथ सांथ
शैतान के
निष्पक्ष राष्ट्रीय
दैनिक समाचार
पत्र के मुख्य
पृष्ट पर
हमारी प्रार्थना
और
हमारे प्रार्थना
करने के
स्थान
अब सामायिक
नहीं रहे
बहुत चिन्ता है
संध्या की प्रार्थना
के लिये ।

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